एक बहुत ही सुंदर जंगल था। उस जंगल में ‘मुनमुन’ नाम की एक छोटी सी चिड़िया रहती थी। मुनमुन बहुत प्यारी थी, लेकिन वह हमेशा उदास रहती थी।
मुनमुन की उदासी
मुनमुन इसलिए उदास थी क्योंकि उसके पंख बिल्कुल सादे और भूरे (Brown) रंग के थे। जंगल में तोता हरा था, और मोर के पास बहुत सारे रंग थे। मुनमुन सोचती थी, “काश! मेरे पास भी ऐसे ही सुंदर और रंग-बिरंगे पंख होते।”
उल्लू दादा की सीख
एक दिन मुनमुन जंगल के सबसे समझदार ‘उल्लू दादा’ के पास गई। उसने अपनी परेशानी बताई।
उल्लू दादा ने प्यार से मुस्कुरा कर कहा, “मुनमुन बेटी, असली सुंदरता बाहर के रंगों में नहीं होती। असली जादू तो हमारे अच्छे कामों में होता है। तुम रोज़ दूसरों की मदद करो, देखना तुम्हारे पंख खुद-ब-खुद जादुई और सुंदर हो जाएंगे।”
जादू की शुरुआत
मुनमुन को उल्लू दादा की बात अच्छी लगी। अगले दिन, मुनमुन उड़ रही थी कि उसने देखा एक छोटी सी चींटी पानी में गिर गई है। मुनमुन ने जल्दी से एक पत्ता पानी में गिरा दिया। चींटी उस पत्ते पर चढ़ गई और उसकी जान बच गई।
जैसे ही मुनमुन ने चींटी की मदद की— छू मंतर! अचानक उसके एक पंख पर बहुत ही प्यारा सा ‘नीला रंग’ आ गया। मुनमुन खुशी से चहकने लगी।
अच्छे कामों का फल
मुनमुन को अब समझ आ गया था। अगले दिन उसने एक भूखी गिलहरी को अपने हिस्से के कुछ मीठे फल दे दिए। तब उसके पंखों पर सुंदर सा ‘लाल रंग’ चमकने लगा।
एक दिन एक छोटी तितली रो रही थी क्योंकि वह अपना रास्ता भूल गई थी। मुनमुन ने उसे उसके घर तक पहुँचाया। तब मुनमुन के पंखों में एक प्यारा सा ‘पीला रंग’ जुड़ गया।
जंगल की सबसे सुंदर चिड़िया
इसी तरह, मुनमुन रोज़ किसी न किसी की मदद करती। धीरे-धीरे मुनमुन के पंख इंद्रधनुष (Rainbow) की तरह सतरंगी हो गए। अब वह पूरे जंगल की सबसे सुंदर चिड़िया दिखती थी। लेकिन सबसे अच्छी बात यह थी कि अब मुनमुन को अपने रंगों से ज्यादा, दूसरों के चेहरे पर खुशी देखकर अच्छा लगता था।
