गाँव के किनारे एक छोटा-सा घर था। उस घर में मोहन अपनी माँ के साथ रहता था। मोहन अभी 12 साल का ही था, लेकिन ज़िंदगी ने उसे बहुत जल्दी समझदार बना दिया था। उसके पिता अब इस दुनिया में नहीं थे। माँ खेतों में काम करती थी और मोहन पढ़ाई के साथ-साथ घर के…
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गाँव के किनारे एक छोटा-सा घर था। उस घर में मोहन अपनी माँ के साथ रहता था। मोहन अभी 12 साल का ही था, लेकिन ज़िंदगी ने उसे बहुत जल्दी समझदार बना दिया था। उसके पिता अब इस दुनिया में नहीं थे। माँ खेतों में काम करती थी और मोहन पढ़ाई के साथ-साथ घर के…